वकील की बकबक से बीवी हुई परेशान, सरेआम बोली- बर्बादी की कगार पर शादीशुदा जिंदगी, अब मैं क्या करुं?

वकील की बकबक से बीवी हुई परेशान, सरेआम बोली- बर्बादी की कगार पर शादीशुदा जिंदगी, अब मैं क्या करुं?

दुनियाभर में अगर किसी के साथ अन्याय होता है या फिर कोई अपराधी अपराध करता है, तो उसकी सुनवाई कोर्ट में होती है. वहां पर दोनों पक्षों के वकील जिरह करते हैं, सबूत पेश करते हैं और अपने क्लाइंट के पक्ष में वो तमाम दलीलें देते हैं, जिससे उनके क्लाइंट को न्याय मिल सके. सही वकील के बिना लोग न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें भी खाते हैं. लेकिन कुछ वकील ऐसे भी होते हैं, जो अपना हुनर घर पर ही दिखाने लगते हैं. ऐसे में घर टूटने की भी नौबत आ जाती है.

सोशल मीडिया पर अपने वकील पति की बकबक से परेशान एक महिला ने लोगों से सलाह मांगी है. इस महिला का कहना है कि उसका पति अक्सर घर पर आकर मुझसे बेमतलब का बहस करता है, जिसकी वजह से मेरी शादीशुदा जिंदगी बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है. मैं ऐसा क्या करुं, जिससे हमारी लाइफ फिर से पटरी पर आ जाए.

सोशल मीडिया साइट रेडिट पर महिला ने अपनी परेशानी को व्यक्त किया है.

महिला ने अपनी पहचान उजागर नहीं की है. लेकिन रेडिट पर उसने लिखा है कि मैं 27 साल की हूं, जबकि मेरे पति 36 साल के पेशेवर वकील हैं. वो अक्सर बेमतलब का बहस करते हैं. इस वजह से मैं पूरी तरह टूट चुकी हूं. मैं उनसे कैसे बात करुं और अपनी व्यथा बताऊं? महिला ने विस्तार से बताते हुए लिखा है कि मुझे नहीं पता कि मैं और कितना सहन कर पाऊंगी. मैं अपने रिश्ते से पूरी तरह टूट गई हूं और शक्तिहीन महसूस कर रही हूं. ऐसा लगता है कि जब भी हम किसी बात पर असहमत होते हैं, तो वह इसे वाद-विवाद प्रतियोगिता समझने लगते हैं.

वे मेरी बातों में तार्किक त्रुटियां निकालते हैं और अक्सर कमतर आंकते हैं. इतना ही नहीं, मुझे नीचा दिखाने के लिए वे अपने वकील की चालों का इस्तेमाल करते हैं. बहस के बाद मुझे ऐसा महसूस होता है कि मैं मूर्ख हूं.

इस बात पर झगड़ रहे थे कि छुट्टियां कहां बिताएं

महिला ने आगे लिखा है कि पिछले हफ़्ते, हम इस बात पर झगड़ रहे थे कि छुट्टियां कहां बिताएं. मैंने उसे समझाने की कोशिश की कि इस साल अपने परिवार के साथ रहना मेरे लिए कितना मायने रखता है. लेकिन वे इसे सुनने के बजाय बेमतलब का कुतर्क करने लगे.

एक और बार, मैंने उनसे कहा कि आप मुझे समय नहीं देते हैं और देर तक काम करते हैं. इस पर भी वो बहस करने लगे और कहा कि ज्यादा काम करता हूं तो इसका ये मतलब नहीं है कि मैं तुम्हारी परवाह नहीं करता. मुझे इन बातों को सुनने के बाद ऐसा लगता है कि मैं हार रही हूं. खुद को अलग-थलग महसूस करने लगी हूं. आखिर मैं क्या करुं?

महिला के इस सवाल पर कई लोगों ने जवाब दिया. एक यूजर ने लिखा कि आगे से जब भी वो बहस करे, तुरंत आप चिल्लाकर बोल दीजिए कि यह घर है, कोर्ट नहीं. जहां आप दलीलें देते हैं. क्या आप समस्या को सुलझाना चाहते हैं या बहस जीतना उदेश्य है. वहीं, दूसरे यूजर ने लिखा है कि मेरी पत्नी भी वकील है.

शुरुआत में वो भी अक्सर ऐसा ही करती थी. एक बार मैंने उससे कहा कि तुम तर्क देकर जीतने की कोशिश कर रही हो, ना कि समस्या को हल करना चाहती हो. उसे समझ आ गया. इसके बाद भी वो कई बार मुझसे बहस करती और मैं तुरंत उसे याद दिला देता. इसके बाद हम बात करके समस्या का समाधान ढूंढते. हालांकि, अब वो वकालत छोड़ चुकी है.