‘बुरी खबर है, हम किसी समझौते पर नहीं पहुंचे…’, जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी शर्तें मानने से किया इनकार

‘बुरी खबर है, हम किसी समझौते पर नहीं पहुंचे…’, जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी शर्तें मानने से किया इनकार

US Iran Peace Talks: पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता का पहला चरण 15 घंटे बाद खत्म हुआ।

अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता का पहला चरण शनिवार देर रात समाप्त हो गया। यह बातचीत करीब 15 घंटे तक चली, जिसे राजनयिक स्तर पर एक अहम प्रगति माना जा रहा है।

वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में चर्चा

अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचे हैं। वहीं, ईरान की तरफ से मोहम्मद बागेर गालिबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल बातचीत में शामिल हुआ। दोनों पक्षों ने युद्धविराम और क्षेत्रीय तनाव कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

पाकिस्तान के प्रस्ताव पर लिया गया ब्रेक

ईरानी सरकार ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि पाकिस्तान के प्रस्ताव पर दोनों देश बातचीत में अस्थायी विराम के लिए सहमत हुए।

जेडी वैंस ने कहा, बुरी खबर यह है कि…

पहले दौर की यूएस-ईरान वार्ता के बाद जेडी वैंस ने कहा, बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं। मेरा मानना है कि यह खबर अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए कहीं अधिक खराब है। इसलिए हम बिना किसी समझौते के अमेरिका वापस जा रहे हैं। उन्होंने हमारी शर्तों को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है।

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता न हो पाने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस्लामाबाद से रवाना हो गए। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा, “मुझे लगता है कि यह खबर अमेरिका के मुकाबले ईरान के लिए कहीं ज्यादा बुरी है। इसलिए, हम बिना किसी समझौते के अमेरिका लौट रहे हैं…उन्होंने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है।”

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता- ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “देखते हैं क्या होता है। हम ईरान के साथ गहन बातचीत कर रहे हैं, जीत हमारी ही होगी। हमने उन्हें सैन्य रूप से हरा दिया है। हम जलडमरूमध्य में पूरी तरह से सक्रिय हैं। चाहे समझौता हो या न हो, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता और इसका कारण यह है कि हम जीत चुके हैं… हमें नाटो से कोई मदद नहीं मिली।”