धर्मेंद्र कैसे बने शोले के ‘वीरू’? फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने बताए दिलचस्प किस्से

धर्मेंद्र कैसे बने शोले के ‘वीरू’? फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने बताए दिलचस्प किस्से

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र (Dharmendra) का सोमवार, 24 नवंबर को 89 वर्ष की उम्र में निधन (Dharmendra Death) हो गया। उनके जाने के बाद शोले के निर्देशक रमेश सिप्पी ने एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता को याद करते हुए फिल्म की शूटिंग से जुड़ी कई दिलचस्प बातें शेयर कीं।

क्यों थे धर्मेंद्र ‘वीरू’ के लिए परफेक्ट?

रमेश सिप्पी बताते हैं कि धर्मेंद्र को वीरू के किरदार के लिए चुनना उनके लिए बिल्कुल स्वाभाविक निर्णय था। उन्होंने कहा कि मैं ‘सीता और गीता’ में उनके साथ काम कर चुका था। तभी मुझे पता चल गया था कि धर्म जी कितने प्रतिभाशाली हैं। जब ‘शोले’ की स्क्रिप्ट तैयार हुई तो मैंने साफ कहा सीता और गीता वाले तीनों कलाकारों को मैं फिर दोहराना चाहता हूँ।

जैसे-जैसे स्क्रिप्ट आगे बढ़ी, पूरा स्टारकास्ट अपने-अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठता गया। जया बच्चन और अमिताभ बच्चन के किरदार भी उसी के अनुसार गढ़े गए और अंत में अमजद खान ने गब्बर के रोल को अमर बना दिया। सिप्पी भावुक होकर कहते हैं ‘धर्म जी अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन शोले की जान वही थे। ट्रेन वाले दृश्य से लेकर जय की मौत पर वीरू के फूट पड़ने तक, हर सीन में उनकी एनर्जी, इमोशन और सहजता अद्भुत थी।’

धर्मेंद्र की सबसे बड़ी खूबी थी उनकी नैचुरल एनर्जी

रमेश सिप्पी के अनुसार वीरू के व्यक्तित्व में जो रोमांच और हल्की-फुल्की शरारत थी, वह धर्मेंद्र की अपनी एनर्जी से और निखर उठी। स्क्रिप्ट के मुताबिक वीरू एक खुले, जीवंत और बहिर्मुखी स्वभाव का व्यक्ति है, जबकि अमित जी का किरदार शांत और भीतर तक गहन। यह कंट्रास्ट दोनों ने कमाल से निभाया। धर्म जी ने कई गंभीर भूमिकाएँ भी की थीं, लेकिन ऐसे चटकीले किरदारों में वे और चमकते थे।

सिप्पी बताते हैं कि धर्मेंद्र अन्य किरदारों को लेकर भी उत्सुक थे। उन्होंने कहा था – क्या मैं संजीव कुमार वाला रोल करूँ? या गब्बर वाला? लेकिन फिर खुद ही हँसकर बोले – नहीं, मैं वीरू ही करूँगा।

सेट से जुड़ी एक प्यारी याद

रमेश सिप्पी ने शोले की शूटिंग का एक खास किस्सा सुनाया कि क्लाइमैक्स में जब उन्हें दो खंभों से बाँधा जाता है तो वे असहज महसूस कर रहे थे। लेकिन जब मैंने समझाया कि यही वह क्षण है जहाँ से वीरू की ऊर्जा फूटकर बाहर आएगी, तभी यह दृश्य अपनी ताकत दिखा पाया।

वे बताते हैं कि हेमा मालिनी के नाचते हुए ‘बसंती’ वाले दृश्य में धर्मेंद्र भावनाओं में सचमुच डूब गए थे। वे कहते थे ‘मैं उसे ऐसे कैसे नाचने दूँ?’ और जैसे ही वह बंधन तोड़ते हैं, वीरू शेर की तरह लड़ता है। अमित जी के किरदार जय की मौत ने भी उन्हें भीतर तक हिला दिया था।’

ऑफ-कैमरा धर्मेंद्र की मासूमियत और मर्दानगी

रमेश सिप्पी जीवन भर की यादों को समेटते हुए कहते हैं कि धर्म जी में बच्चे जैसी मासूम जिज्ञासा थी और साथ ही वह पुरुषार्थ और आकर्षण भी जिससे हर महिला सुरक्षित महसूस करे। वह दिल से दयालु, उत्साही और बेहद प्यार करने वाले इंसान थे। उन्होंने धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की प्रेम कहानी का भी जिक्र किया। उन्होंने यह रिश्ता बेहद खूबसूरती से निभाया और अंततः शादी तक ले गए।

शोले का सीक्वल क्यों नहीं बना?

सिप्पी ने कहा कि शोले एक ऐसी कृति है, जिसे छेड़ने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। 50 साल बाद भी इसकी चर्चा होती है, यही इसकी बेमिसाल सफलता का प्रमाण है। अगर इसके कई सीक्वल बना दिए जाते, तो शायद इसका जादू फीका पड़ जाता।